कलाओं को मूलभूत रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया गया है— ललित कलाएँ एवं उपयोगी कलाएँ।
“गीत, वाद्य तथा नृत्य त्रय संगीतमुच्यते।”
स्रोत: संगीत रत्नाकर (श्लोक 21, स्वरगताध्याय:)
भावार्थ: गायन, वादन तथा नृत्य—इन तीनों कलाओं के समावेश को संगीत कहते हैं। संगीत में गीत, वाद्य व नृत्य तीनों समन्वित हैं।
शास्त्रों में वर्णित नियमों के आधार पर निर्मित संगीत को शास्त्रीय संगीत कहा जाता है।
जिन गेय विधाओं में संगीत के नियमों के कठोर पालन की अपेक्षा रस, भाव और रंजकता की प्रधानता रहती है, वे उपशास्त्रीय संगीत की श्रेणी में आती हैं।
'सुगम' शब्द का अर्थ है 'सरल' या 'सहज'। अतः सुगम संगीत का अर्थ है—सरलता या सहजता से गाए-बजाए जाने वाला संगीत।
लोक संगीत का तात्पर्य सामान्य जनमानस के संगीत से है। यह किसी विशिष्ट व्यक्ति की रचना नहीं होती, बल्कि लोक की चेतना की अभिव्यक्ति होती है।
| प्रदेश | गायन एवं नृत्य शैलियाँ |
|---|---|
| असम | बिहू, छऊ आदि। |
| उत्तर प्रदेश | होरी, बारहमासा, कजरी, चैती, रसिया, लांगुरिया, बिरहा, रासलीला, नौटंकी के गीत आदि। |
| गुजरात | गरबा, रास, डांडिया आदि। |
| पंजाब | हीर, टप्पा, गिद्धा, भांगड़ा आदि। |
| महाराष्ट्र | लावणी, मंगलागौर आदि। |
| राजस्थान | गोरबंद, मांड, घूमर, झूमर, कालबेलिया आदि। |
| जम्मू कश्मीर | भाण्ड, पाथिर, रउफ़, जबरो, चकरी आदि। |
| अरुणाचल प्रदेश | टापू, पोनंग, नीशीदोऊ, लोकूबवांग आदि। |
| केरल | तिरुवादिरकली, पाना, थुल्लल, थेय्यम आदि। |
| आंध्र प्रदेश | धिमसा, बुर्रा कत्था, तोलू बोम्मालता, रोत्तेला पंडुगा आदि। |
| पश्चिम बंगाल | बाऊल, रबिन्द्र संगीत, भटियाली, गोडीय, छऊ आदि। |
मानव जीवन के विभिन्न संस्कारों, रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के समय गाए जाने वाले गीतों को संस्कार गीत कहा जाता है।
बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक पंडित सामता प्रसाद मिश्र उर्फ गुदई महाराज का भारतीय संगीत में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
इन्हें तबला का जादूगर, ताल मार्तण्ड, ताल शिरोमणि, तबला विजार्ड, तबला सम्राट, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, हाफ़िज़ अली खाँ सम्मान, पद्मश्री तथा पद्मभूषण से अलंकृत किया गया था।
निधन: 21 मई, 1994 को पुणे में एक कार्यशाला के दौरान हृदय गति रुक जाने से इनका देहांत हो गया।