मानव जीवन में कलाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। कलाओं को मूलभूत रूप से दो मुख्य भागों में वर्गीकृत किया गया है:
संगीत रत्नाकर ग्रंथ के अनुसार संगीत की परिभाषा इस प्रकार दी गई है:
“गीतं, वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते।”
भावार्थ: गायन, वादन तथा नृत्य इन तीनों कलाओं के समावेश को संगीत कहते हैं। संगीत का मूल आधार स्वर और लय है। स्वर और लय के साथ भाषा, कविता या पद का समन्वय संगीत को अनूठा आकर्षण प्रदान करता है।
प्राचीन काल से ही गान (गीत) के दो मुख्य रूप माने गए हैं— मार्गी संगीत और देशी संगीत।
वह संगीत जिसमें शास्त्रों में वर्णित नियमों का कठोरता या दृढ़ता से पालन किया जाना अनिवार्य हो, उसे मार्गी संगीत कहा जाता है।
मार्गोदेशीति तद् द्वेधा तत्र मार्ग स उच्छ्यते।
यो मार्गितो विरिञ्चाद्यै प्रयुक्तो भरतादिभि:।।स्रोत: संगीत रत्नाकर, श्लोक 22, स्वरगताध्याय
विभिन्न स्थानों की जनरुचि के अनुरूप हृदय को रंजन (आनंदित) करने वाले गायन, वादन व नृत्य को देशी संगीत कहा जाता है।
देशे देशे जनानां यद्रुच्याह्रदयरञ्जकम्।
गीतं वादनं च नृत्तं तद्देशीत्यभिधीयते।।स्रोत: संगीत रत्नाकर, श्लोक 23, स्वरगताध्याय
शास्त्रों में वर्णित नियमों के आधार पर निर्मित और अनुशासित संगीत को शास्त्रीय संगीत कहा जाता है।
जिन गेय विधाओं में शास्त्रीय नियमों के कठोर पालन की अपेक्षा रस, भाव और रंजकता (मनोरंजन) को प्रधानता दी जाती है, उन्हें उपशास्त्रीय संगीत कहा जाता है। इसमें एक राग से दूसरे राग में जाने की स्वतंत्रता होती है।
सुगम का अर्थ है 'सरल' या 'सहज'। नियमों के बंधन से मुक्त, सहजता से गाया-बजाया जाने वाला संगीत सुगम संगीत कहलाता है।
सामान्य जनमानस के स्वाभाविक उद्गारों, रीति-रिवाजों और सामाजिक परिवेश को अभिव्यक्त करने वाला संगीत लोक संगीत कहलाता है। इसके लिए किसी व्याकरण या शास्त्रीय प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
| प्रदेश | प्रचलित लोक गायन एवं नृत्य शैलियाँ |
|---|---|
| असम | बिहू, छाऊ आदि। |
| उत्तर प्रदेश | होरी, बारहमासा, कजरी, चैती, रसिया, लांगुरिया, बिरहा, रासलीला, नौटंकी आदि। |
| गुजरात | गरबा, रास, डांडिया आदि। |
| पंजाब | हीर, टप्पा, गिद्धा, भाँगड़ा आदि। |
| महाराष्ट्र | लावणी, मंगलागौर आदि। |
| राजस्थान | गोरबंद, मांड, घूमर, झूमर, कालबेलिया आदि। |
| जम्मू-कश्मीर | भाण्ड, पाथिर, राउफ, जबरो, चकरी आदि। |
| अरुणाचल प्रदेश | टापू, पोनुंग, नीशीदोऊ, लोकूबवांग आदि। |
| केरल | तिरूवादिरकली, पाना, तुल्लल, थेय्यम आदि। |
| आंध्र प्रदेश | धिमसा, बुर्रा कत्था, तोलू बोम्मालता, रोत्तेला पंडुगा आदि। |
| पश्चिम बंगाल | बाऊल, रबिन्द्र संगीत, भटियाली, गोडीय, छाऊ आदि। |
भारतीय संगीत के इतिहास में महिलाओं के योगदान और ऐतिहासिक उपलब्धियों का विशेष स्थान है।