Sangeet: Class 11 (Book 2) — Chapter 6: राग परिचय एवं बंदिशें

राग भैरव (Raga Bhairav)

भैरव थाट रे ध कोमल, धैवत ऋषभ सम्वाद।
प्रात: समय गुनी जन गावत, भैरव पूरण राग।।


भावार्थ / विश्लेषण: यह श्लोक राग भैरव के मूल लक्षणों को दर्शाता है। यह राग भैरव थाट से उत्पन्न होता है, जिसमें रे (ऋषभ) और ध (धैवत) स्वर कोमल होते हैं। इसका वादी स्वर धैवत तथा संवादी स्वर ऋषभ है। यह एक संपूर्ण जाति का राग है जिसे प्रात:काल में गाया जाता है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): भैरव थाट से उत्पन्न आश्रय राग।
  • स्वर लक्षण: ऋषभ (रे॒) और धैवत (ध॒) कोमल, शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वरों का प्रयोग)।
  • वादी स्वर: ध (धैवत) | संवादी स्वर: रे (ऋषभ)।
  • गायन समय: प्रातःकाल (संधिप्रकाश समय)।
  • प्रकृति: गंभीर और शांत रस प्रधान।
  • विशेषताएँ: आरोह में ऋषभ का अल्पत्व रहता है। रे-ध स्वरों पर आंदोलन और मध्यम (म) से ऋषभ (रे) की मींड इस राग की मुख्य पहचान है। कर्नाटक संगीत में इसे मायामालवगौल कहा जाता है। इसे संगीत मनीषियों द्वारा 'आदि राग' भी माना गया है।
  • आरोह: स रे॒ ग म, प ध॒, नि सं
  • अवरोह: सं नि ध॒, प म ग, रे॒, स
  • पकड़: ग म ध॒ ध॒ प, ग म रे॒ रे॒ स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. त्रिताल (मध्य लय) - स्थायी व अंतरा

  • स्थायी: धन धन मूरत कृष्ण मुरारी सुलच्छन गिरिधारी छबि सुंदर लागे अति प्यारी
  • अंतरा: बंसी धर मन मोहन सुहावे बलि बलि जाऊँ मोरे मन भावे सब रंग ज्ञान विचारी

2. एकताल (विलंबित)

  • स्थायी: बिना हरि कौन खबर मोरी लेत
  • अंतरा: काहे को सोच करे मन मूरख नित उठि भोजन देत

3. धमार (ताल—धमार) - डागर घराने की बंदिश

  • स्थायी: आज धूम मची है बृज में आली, अब कैसे मान रहे गोरी
  • अंतरा: चोहा चंदन और अतर अरगजा केसर रंग मचे गौरी

राग भैरव पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
जागो मोहन प्यारे जागोजागते रहो (1956)लता मंगेशकरसलिल चौधरीशैलेंद्र सिंह
अम्मा रोटी दे, बाबा रोटी देसंसार (1951)लता मंगेशकरवी. एस. कल्ला, इमानी शंकरा शास्त्री, एम. डी. पार्थ शास्त्रीपं. इंद्र चंद्र
मोहे भूल गये साँवरियाबैजू बावरा (1952)लता मंगेशकरनौशादशकील बदायूँनी
इक ऋतु आए इक ऋतु जाए, मौसम बदले ना बदले नसीबगौतम गोविंदा (1979)किशोर कुमारलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शी
राग खमाज (Raga Khamaj)

चढ़त रिखब न लगाइये, कोमल म-नी विराज।
ग-नि वादी-संवादी तें कहयित राग खमाज।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग खमाज के आरोह में ऋषभ (रे) स्वर वर्जित है। इसमें दोनों निषाद (नि) प्रयुक्त होते हैं (आरोह में शुद्ध निषाद और अवरोह में कोमल निषाद)। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): खमाज थाट का आश्रय राग।
  • स्वर लक्षण: आरोह में शुद्ध निषाद (नि) तथा अवरोह में कोमल निषाद (नि॒) का प्रयोग। शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: षाड्व-संपूर्ण (आरोह में ऋषभ वर्जित होने के कारण 6 स्वर और अवरोह में सभी 7 स्वर)।
  • वादी स्वर: ग (गांधार) | संवादी स्वर: नि (निषाद)।
  • गायन समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर।
  • प्रकृति: चंचल और श्रृंगार रस प्रधान (ठुमरी अंग का राग)। इसमें ठुमरी, भजन, टप्पा और देश-भक्ति गीत बहुतायत से गाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ: अवरोह में पंचम (प) स्वर को वक्र करके प्रयोग किया जाता है। दक्षिण भारतीय संगीत में इसे हरिकाम्भोजी कहा जाता है।
  • आरोह: स ग, म प, ध नि सं
  • अवरोह: सं नि॒ ध प, म ग, रे स
  • पकड़: नि॒ ध, म प ध ऽ म ग

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. त्रिताल (मध्यलय)

  • स्थायी: नमन करूँ मैं सद्-गुरु चरणा सब दुख हरणा भव निस्तरणा
  • अंतरा: शुद्ध भाव धर अंत: करणा सुर नर किन्नर वंदित चरणा

2. धमार (ताल-धमार) - डागर घराने की बंदिश

  • स्थायी: श्याम रंग डारत बरजोरी चुनरी भिजोई गागर फोरी
  • अंतरा: रंग पिचकारी तक तक मारी छाडो छाड़ो गैलहि मोरी

राग खमाज पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैयाअमर प्रेम (1971)लता मंगेशकरराहुल देव वर्मनआनन्द बख्शी
आन मिलो सजना, अँखियों में ना आये निंदियागदर–एक प्रेम कथा (2001)पं. अजय चक्रवर्ती, परवीन सुल्तानाउधमसिंहआनन्द बख्शी
वैष्णव जन तो तेने कहिये (भजन)-पारंपरिक (लेखक: नरसी मेहता)-नरसी मेहता
आयो कहाँ से घन श्यामबुड्ढा मिल गया (1971)मन्ना डे, अर्चनाराहुल देव वर्मनमज़रूह सुल्तानपुरी
राग यमन (Raga Yaman / Kalyan)

सबही शुद्ध सुर जहाँ, वादी गंधार सुहाय।
अरु संवादि निखाद तें, ईमन राग कहाय।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग यमन (कल्याण) में मध्यम (म) स्वर तीव्र प्रयुक्त होता है और अन्य सभी स्वर शुद्ध होते हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है। इसे 'ईमन' या 'कल्याण' भी कहा जाता है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): कल्याण थाट का आश्रय राग।
  • स्वर लक्षण: मध्यम तीव्र (म॑), शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वरों का प्रयोग)।
  • वादी स्वर: ग (गांधार) | संवादी स्वर: नि (निषाद)।
  • गायन समय: रात्रि का प्रथम प्रहर।
  • प्रकृति: गंभीर और शांत रस प्रधान।
  • विशेषताएँ: इस राग का चलन प्रायः मंद्र निषाद (ऩि) से शुरू होता है। इसमें शुद्ध मध्यम (म) का प्रयोग केवल अवरोह में किंचित दो गांधारों के बीच किया जाता है (जैसे- प म ग म ग रे ऩि रे स), जिससे यह 'यमन कल्याण' बन जाता है। कर्नाटक संगीत में इसे कल्याणी कहा जाता है।
  • आरोह: ऩि रे ग म॑ प ध नि सं
  • अवरोह: सं नि ध प म॑ ग रे स
  • पकड़: ऩि रे ग म॑ प, रे ग रे ऩि रे स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. त्रिताल (मध्यलय)

  • स्थायी: गुरु बिन कैसे गुन गावे गुरु न माने तो गुन नहि आवे गुनियरन में बेगुनी कहावे
  • अंतरा: माने तोरी भावे सबको चरन गहे सादी कनके जब गावे अचपल ताल सुर

2. लक्षणगीत (एकताल - मध्यलय)

  • स्थायी: सब गुनि जन इमन गात तीवर सुर करत साथ
  • अंतरा: सुर वादि गंधार साध समवादि कर निखाद रात समय प्रथम प्रहर चतुर सुजन मन रिझात

3. एकताल (विलंबित)

  • स्थायी: मेरा मन बाँध लीनो रे हाँ रे इन जोगीया के साथ
  • अंतरा: सदारंग करम करो क्यूँ ना इन प्रान नाथ के हाथ

4. चौताल (ध्रुपद अंग)

  • स्थायी: अधर लगाई रस प्याई बाँसरी बजाई, मेरो नाम गाई, हाय जादू कियो मन में
  • अंतरा: नटखट नवल सुघर नंद नंदनी करी के अचेत चेत हरी के जतन में

राग यमन पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
तू ही राम है, तू रहीम है, तू करीम कृष्ण खुदा हुआभजन (श्री रामचन्द्र कृपालु)लता मंगेशकर-पारंपरिक
अभी ना जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहींहम दोनों (1961)आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ीजयदेवसाहिर लुधियानवी
आये हो मेरी ज़िन्दगी में, तुम बहार बनकेराजा हिन्दुस्तानी (1996)उदित नारायणनदीम श्रवणसमीर
इन्हीं लोगों ने ले लीना, दुपट्टा मेरापाकीज़ा (1972)लता मंगेशकरगुलाम मोहम्मद, नौशादमज़रूह सुल्तानपुरी
राग भूपाली (Raga Bhupali)

आरोही अवरोहि में सुर मनि कीन्हीं त्याग।
ध - ग संवादी-वादि तें कहि राग भूपाल।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग भूपाली के आरोह और अवरोह दोनों में मध्यम (म) और निषाद (नि) स्वर पूर्णतः वर्जित हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर धैवत (ध) है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): कल्याण थाट से उत्पन्न राग।
  • स्वर लक्षण: मध्यम (म) और निषाद (नि) वर्जित, शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: औडव-औडव (आरोह और अवरोह दोनों में 5-5 स्वर)।
  • वादी स्वर: ग (गांधार) | संवादी स्वर: ध (धैवत)।
  • गायन समय: रात्रि का प्रथम प्रहर।
  • प्रकृति: गंभीर और शांत रस प्रधान (पूर्वांग प्रधान राग)। इसमें ठुमरी नहीं गाई जाती। ध्रुपद, बड़ा ख्याल, छोटा ख्याल और तराना मुख्य रूप से गाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ: दक्षिण भारतीय संगीत में इसे मोहनम राग कहा जाता है।
  • आरोह: स रे ग प ध सं
  • अवरोह: सं ध प ग रे स
  • पकड़: ग रे स ध़, स रे ग, प ग, ध प ग, रे स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. चौताल (विलंबित)

  • स्थायी: तू हि सूर्य तू हि चंद्र तू हि पवन तू हि अगन तू हि आप तू अकास तू हि धरनि यजमान
  • अंतरा: भव रूद्र उग्र सर्वपशुपती सम समान ईशान भीम सकल तेरे ही अष्ट नाम

2. त्रिताल (मध्यलय) - बंदिश 1

  • स्थायी: दरशन दीजे त्रिभवन पाली त्रिभवन नायक बहु सुख दायक विलम करो मत हाली
  • अंतरा: अति उदार गत अगम निगम के रसिकन के रस ख्याली श्री कमलापति बृज के वासी कर खुशाल प्रति पाली

3. त्रिताल (मध्यलय) - बंदिश 2

  • स्थायी: इतनो जोबन पर मान न करिये डरिये प्रभुसों आज आली
  • अंतरा: जो कोई आवे अपने ढिंगवा तासों गरबन कीजिये सदारंग यह रीत माने

4. ध्रुपद (चौताल) - डागर घराने की बंदिश

  • स्थायी: तान तलवार तार की सिपर लिए फिरत, गुनि अपने मन मानि जहाँ तहाँ बजित तत तुरतु
  • अंतरा: सुर कमान बोल वाण छूटे जहाँ लागत रीझत सुझावत विद्याधर फुरत

राग भूपाली पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
चंदा है तू मेरा, सूरज है तूअराधना (1969)लता मंगेशकरसचिन देव वर्मनआनन्द बख्शी
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा ना कोईमीरा (1947)एम. एस. सुब्बुलक्ष्मीएस. वी. वेंकटरमनपं. नरेन्द्र शर्मा
इन आँखों की मस्ती के, मस्ताने हज़ारों हैंउमराव जान (1981)आशा भोंसलेखैय्यामहसरत जयपुरी
पंछी बनूँ, उड़ती फिरूँ, मस्त गगन मेंचोरी‑चोरी (1956)लता मंगेशकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरी
देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुएसिलसिला (1981)आशा भोंसले, किशोर कुमारशिव हरिजावेद अख्तर
राग अल्हैया बिलावल (Raga Alhaiya Bilaval)

थाट बिलावल प्रथम दिवस उतरत दोउ निषाद।
आरोहन मध्यम तजि कर, मानत ध ग सम्वाद।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग अल्हैया बिलावल बिलावल थाट से उत्पन्न होता है। इसके आरोह में मध्यम (म) स्वर वर्जित रहता है। अवरोह में दोनों निषाद (शुद्ध और कोमल) प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर धैवत (ध) और संवादी स्वर गांधार (ग) है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): बिलावल थाट से उत्पन्न राग।
  • स्वर लक्षण: सभी स्वर शुद्ध, परंतु अवरोह में कोमल निषाद (नि॒) का अल्प प्रयोग किया जाता है।
  • जाति: षाड्व-संपूर्ण (आरोह में मध्यम वर्जित होने के कारण 6 स्वर और अवरोह में सभी 7 स्वर)।
  • वादी स्वर: ध (धैवत) | संवादी स्वर: ग (गांधार)।
  • गायन समय: दिन का प्रथम प्रहर (प्रातःकाल)।
  • प्रकृति: शांत और प्रसन्नता प्रदान करने वाला (उत्तरांग प्रधान राग)।
  • विशेषताएँ: शुद्ध बिलावल और अल्हैया बिलावल दो अलग राग हैं। शुद्ध बिलावल में कोमल निषाद का प्रयोग नहीं होता, जबकि अल्हैया बिलावल में कोमल निषाद का विशिष्ट प्रयोग अवरोह में पंचम के साथ वक्र रूप में होता है।
  • आरोह: स ग रे ग प ध नि सं
  • अवरोह: सं नि ध प, ध नि॒ ध प, म ग म रे, स
  • पकड़: ग रे ऽ ग प, म ग म रे ग प ध नि ध प

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. त्रिताल (16 मात्राएँ)

  • स्थायी: तू ही आधार सकल त्रिभवन को पालक सच राचर भू तन को
  • अंतरा: तू ही विष्णू तू नारायण कारण तू पर ब्रह्म जगत को

2. लक्षणगीत (त्रिताल - मध्य लय)

  • स्थायी: तब कहत बिलावल भेद चतुर जब मेल मिलावत शुद्ध सुरन को प्रात समय नित प्रथम प्रहर
  • अंतरा: धैवत वादी ग समवादी अष्ट भेद सब गाय मधुर

3. मध्य लय (त्रिताल)

  • स्थायी: जाग उठे सब जन तुम जागो, गौवन के चर वाल चरैया
  • अंतरा: ग्वाल बाल सब गौव चरावत, तुमरे कारन आवत धावत, सदारंग मन तुम सों लागो

राग अल्हैया बिलावल पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
एक प्यार का नग़मा है, मोजों की रवानी हैशोर (1978)लता मंगेशकर, मुकेशलक्ष्मीकांत प्यारेलालसंतोष आनंद
तुमको देखा तो ये खयाल आयासाथ‑साथ (1992)जगजीत सिंहकुलदीप सिंहजावेद अख्तर
सारे के सारे, गा मा को लेकर गाते चलेपरिचय (1972)किशोर कुमार, आशा भोंसलेराहुल देव वर्मनगुलज़ार
बहती हवा सा था वो, उड़ती पतंग सा था वो3 इडियट्स (2009)शान, शांतनु मोइत्राशांतनु मोइत्रासवानन्द किरकिरे
राग भैरवी (Raga Bhairavi)

रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी।
प्रात समय जाति संपूर्ण, सोहत सा संवादी।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग भैरवी में ऋषभ (रे), गांधार (ग), धैवत (ध) और निषाद (नि) ये चारों स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षड्ज (स) है। यह प्रातःकाल गाया जाने वाला संपूर्ण जाति का राग है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): भैरवी थाट का आश्रय राग।
  • स्वर लक्षण: रे॒ ग॒ ध॒ नि॒ कोमल, शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वरों का प्रयोग)।
  • वर्जित स्वर: कोई नहीं।
  • वादी स्वर: म (मध्यम) | संवादी स्वर: स (षड्ज)।
  • गायन समय: प्रातःकाल (परंतु इसे संगीत सभाओं के समापन राग के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है)।
  • प्रकृति: चंचल, श्रृंगार और करुण रस प्रधान। इसमें छोटा ख्याल, तराना, टप्पा, ठुमरी और भजन मुख्य रूप से गाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ: कर्नाटक संगीत में इसे हनुमत्तोड़ी के नाम से जाना जाता है।
  • आरोह: स रे॒ ग॒ म प ध॒ नि॒ सं
  • अवरोह: सं नि॒ ध॒ प म ग॒ रे॒ स
  • पकड़: म ग॒, स रे॒ स, ध़॒ नि़॒ स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. त्रिताल (मध्य लय)

  • स्थायी: कैसी ये भलाई रे कन्हाई, पनियाँ भरत मोरी गगरी गिराइ, करके लराई
  • अंतरा: सनद कहे ऐसो ढीठ भयो कन्हाई, का करूँ माने नहि मानत कन्हाई करत लराई

2. दीपचंदी ताल - रचनाकार: पं. प्रेमप्रकाश जौहरी (मेरठ)

  • स्थायी: डोले रे जीवन मदमाती गज़ुरिया, देखो नाही लागे काहू की नज़रिया
  • अंतरा: गजगामिनी सी जात कुँजन में, कोई पूछे जाना है कौन नगरिया

राग भैरवी पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
आवारा हूँ या गर्दिश में हूँ आसमान का तारा हूँआवारा (1951)मुकेशलक्ष्मीकांत प्यारेलालशैलेन्द्र
भोर भये पनघट पे, मोरीसत्यम् शिवम् सुन्दरम् (1978)लता मंगेशकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालजावेद अख्तर
दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समायीतीसरी कसम (1966)मुकेशशंकर जयकिशनसवानन्द किरकिरे
राग भीमपलासी (Raga Bhimpalasi)

जब काफी के मेल में, आरोहन रि ध त्याग।
तृतीय प्रहर दिन ग, नि कोमल, मानत म स संवाद।।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग भीमपलासी काफी थाट के अंतर्गत आता है। इसके आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) स्वर वर्जित हैं। इसमें गांधार (ग) और निषाद (नि) स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षड्ज (स) है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): काफी थाट से उत्पन्न राग।
  • स्वर लक्षण: गांधार (ग॒) और निषाद (नि॒) कोमल, शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: औडव-संपूर्ण (आरोह में 5 स्वर और अवरोह में सभी 7 स्वर)।
  • वर्जित स्वर: आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) वर्जित।
  • वादी स्वर: म (मध्यम) | संवादी स्वर: स (षड्ज)।
  • गायन समय: दिन का तृतीय प्रहर (अपरान्ह काल)।
  • प्रकृति: गंभीर और शांत रस प्रधान (पूर्वांग प्रधान राग)। इसमें दादरा या ठुमरी गाने का प्रचलन नहीं है। ख्याल, ध्रुपद और तराना मुख्य रूप से गाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ: इस राग में स-म और प-ग की संगति बार-बार दिखाई जाती है। इसका समप्रकृति राग बागेश्री है। कर्नाटक संगीत में इसे आभेरी कहा जाता है।
  • आरोह: ऩि॒ स ग॒ म प नि॒ सं
  • अवरोह: सं नि॒ ध प, म प ग॒ म ग॒ रे स
  • पकड़: ऩि॒ स म, प ग॒ म, ग॒ रे स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. छोटा ख्याल (त्रिताल)

  • स्थायी: जा जा रे अपने मन्दिरवा, सुन पावेगी सास ननदिया
  • अंतरा: सुनहो सदारंग तुमको चाहत है, क्या तुम हमको छगन दिया जा जा रे अपने मन्दिरवा

2. द्रुत ख्याल (चौताल)

  • स्थायी: कुंजन में रच्यो रास, अद्भुत गति लिए गोपाल। कुंडल की झलक देख, कोटि मदन ढीठ कियो।।
  • अंतरा: अधर तो सुरंग रंग, बाँसरी गोपाल संग, तेरी छवि देख-देख, मेरो मन अटक्यो।।

राग भीमपलासी पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
तुम मिले, दिल खिलेक्रिमिनल (1995)कुमार सानू, अल्का याज्ञनिकएम. एम. क्रीमइंदीवर
ऐ अजनबी तू भी कभीदिल से (1998)महालक्ष्मी अय्यर, उदित नारायणए. आर. रहमानगुलज़ार
दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुराके चल दिएदादा (1979)येशुदासजुगल किशोरकुलवन्त जानी
मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थीचंद्रकांता (1996)मो. रफ़ीएन. दत्तसाहिर लुधियानवी
नैनों में बदरा छाए, बिजली चमके मनवा डराएमेरा साया (1966)लता मंगेशकरमदन मोहनराजा मेंहदी अली खाँ
राग बिहाग (Raga Bihag)

आरोहन में रे, ध वर्जित गावत राग बिहाग।
प्रथम प्रहर निशि गाइए सोहत ग-नि संवाद।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग बिहाग के आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) स्वर वर्जित हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है। यह रात्रि के प्रथम प्रहर (या द्वितीय प्रहर) में गाया जाने वाला राग है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): बिलावल थाट से उत्पन्न राग।
  • स्वर लक्षण: सभी स्वर शुद्ध, परंतु तीव्र मध्यम (म॑) का प्रयोग विवादी स्वर के रूप में विशेष सौंदर्य बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • जाति: औडव-संपूर्ण (आरोह में 5 स्वर और अवरोह में सभी 7 स्वर)।
  • वर्जित स्वर: आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) वर्जित।
  • वादी स्वर: ग (गांधार) | संवादी स्वर: नि (निषाद)।
  • गायन समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर।
  • प्रकृति: गंभीर और शांत रस प्रधान। इसमें मुख्य रूप से ख्याल और तराना गाए जाते हैं।
  • विशेषताएँ: इसका समप्रकृति राग यमन कल्याण है।
  • आरोह: ऩि स ग, म प, नि सं
  • अवरोह: सं नि ध प, म॑ ग रे स
  • पकड़: ऩि स, ग म प, ग म ग स

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. तीन ताल (मध्य लय) - रचनाकार: पं. प्रेमप्रकाश जौहरी (मेरठ)

  • स्थायी: ललन मोरी बैयाँ गहो ना, टूट जाएँगी नई-नई चूड़ियाँ ऐसी हमें नीकी ना लागे
  • अंतरा: वंशी सुन सोवत सों लाई ना जानी तेरी चतुराई, पैयाँ परूँ छाड़ो मन हरवा

2. एकताल (विलंबित)

  • स्थायी: कवन ढंग तोरा सजनी, तू तो इतरात उत रात बीती जात
  • अंतरा: छांड़मा न उठ तेरी बला लेहूँ, सोत लगा रहि घात

3. त्रिताल (मध्यलय)

  • स्थायी: मेरो मन अटक्यो सुंदर ध्यान
  • अंतरा: निसवास मोहे पलक न लागत निक सो जात प्राण

4. त्रिताल (विलंबित)

  • स्थायी: जग जीवन थोरा थोरा रे, समझ समझ देख ले
  • अंतरा: सीख मान ले सदारंग की बहुत गई, अब तो जोगी मेख ले

राग बिहाग पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
तेरे प्यार में दिलदारमेरे महबूब (1963)लता मंगेशकरनौशादशकील बदायूँनी
तेरे सुर और मेरे गीतगूँज उठी शहनाई (1959)लता मंगेशकर, मो. रफ़ीबसन्त देसाईभरत व्यास
ये क्या जगह है दोस्तोंउमराव जान (1981)आशा भोंसलेखैय्यामशाहरयार
सुहानी बेरियाँ बीती जाएँमिलान (1946)पारूल घोषअनिल विश्वासआरजू लखनवी
ज़िंदगी के सफर में गुज़र जाते हैं जो मकामआपकी कसम (1974)किशोर कुमारराहुल देव बर्मनआनंद बख्शी
राग जौनपुरी (Raga Jaunpuri)

ग ध नि स्वर कोमल रहे आरोहन ग ध नि।
ध ग वादी सम्वादी से जौनपुरी पहचानी।।


भावार्थ / विश्लेषण: राग जौनपुरी में गांधार (ग), धैवत (ध) और निषाद (नि) स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसके आरोह में गांधार स्वर वर्जित रहता है। इसका वादी स्वर धैवत (ध) और संवादी स्वर गांधार (ग) है।

राग विवरण एवं मुख्य बिंदु

  • उत्पत्ति (थाट): आसावरी थाट से उत्पन्न राग।
  • स्वर लक्षण: गांधार (ग॒), धैवत (ध॒) और निषाद (नि॒) कोमल, शेष सभी स्वर शुद्ध।
  • जाति: षाड्व-संपूर्ण (आरोह में गांधार वर्जित होने के कारण 6 स्वर और अवरोह में सभी 7 स्वर)।
  • वर्जित स्वर: आरोह में गांधार (ग) वर्जित।
  • वादी स्वर: ध (धैवत) | संवादी स्वर: ग (गांधार)।
  • गायन समय: दिन का द्वितीय प्रहर।
  • प्रकृति: गंभीर और भक्ति रस प्रधान (उत्तरांग प्रधान राग)।
  • विशेषताएँ: इस राग में प-ग की संगति बार-बार की जाती है। इसका समप्रकृति राग आसावरी है। आसावरी राग के प्रभाव से बचने के लिए इसमें रे म प का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। माना जाता है कि इस राग की रचना जौनपुर के सुल्तान हुसैन शर्की ने की थी।
  • आरोह: स रे म, प, ध॒ नि॒ सं
  • अवरोह: सं नि॒ ध॒ प, म ग॒ रे स
  • पकड़: म प नि॒ ध॒ प, ध॒ म प ग॒, रे म प

बंदिशें एवं स्वरलिपि

1. तीनताल (मध्य लय) - रचनाकार: पं. प्रेमप्रकाश जौहरी (मेरठ)

  • स्थायी: पनियाँ भरन ना ही देत ढीठ लगरवा ना ही माने मोसे करत है रार
  • अंतरा: सुन री यशोदा तेरौ लाल मीठी-मीठी बतियाँ बनाए माँगत है मोसे जोवनवा को हारे

राग जौनपुरी पर आधारित लोकप्रिय फ़िल्मी गीत

गीत का नामफ़िल्म / चित्रपटगायक / गायिकासंगीतकारगीतकार
घूँघट के पट खोलजोगन (1950)गीता दत्तबूलो सी. रानीमीरा बाई
दिल में हो तुमसत्यमेव जयते (1985)एस. जानकीबप्पी लहरीफारूख कैसर
दिल छेड़ कोई नगमाइंस्पेक्टर (1956)लता मंगेशकरहेमन्त कुमारएस. एच. बिहारी
पल पल है भारीस्वदेश (2004)अल्का याज्ञनिकए. आर. रहमानजावेद अख्तर
मेरी याद में तुम नामदहोश (1951)तलत महमूदमदन मोहनराजा मेंहदी अली खाँ