भैरव थाट रे ध कोमल, धैवत ऋषभ सम्वाद।
प्रात: समय गुनी जन गावत, भैरव पूरण राग।।भावार्थ / विश्लेषण: यह श्लोक राग भैरव के मूल लक्षणों को दर्शाता है। यह राग भैरव थाट से उत्पन्न होता है, जिसमें रे (ऋषभ) और ध (धैवत) स्वर कोमल होते हैं। इसका वादी स्वर धैवत तथा संवादी स्वर ऋषभ है। यह एक संपूर्ण जाति का राग है जिसे प्रात:काल में गाया जाता है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| जागो मोहन प्यारे जागो | जागते रहो (1956) | लता मंगेशकर | सलिल चौधरी | शैलेंद्र सिंह |
| अम्मा रोटी दे, बाबा रोटी दे | संसार (1951) | लता मंगेशकर | वी. एस. कल्ला, इमानी शंकरा शास्त्री, एम. डी. पार्थ शास्त्री | पं. इंद्र चंद्र |
| मोहे भूल गये साँवरिया | बैजू बावरा (1952) | लता मंगेशकर | नौशाद | शकील बदायूँनी |
| इक ऋतु आए इक ऋतु जाए, मौसम बदले ना बदले नसीब | गौतम गोविंदा (1979) | किशोर कुमार | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | आनंद बख्शी |
चढ़त रिखब न लगाइये, कोमल म-नी विराज।
ग-नि वादी-संवादी तें कहयित राग खमाज।।भावार्थ / विश्लेषण: राग खमाज के आरोह में ऋषभ (रे) स्वर वर्जित है। इसमें दोनों निषाद (नि) प्रयुक्त होते हैं (आरोह में शुद्ध निषाद और अवरोह में कोमल निषाद)। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया | अमर प्रेम (1971) | लता मंगेशकर | राहुल देव वर्मन | आनन्द बख्शी |
| आन मिलो सजना, अँखियों में ना आये निंदिया | गदर–एक प्रेम कथा (2001) | पं. अजय चक्रवर्ती, परवीन सुल्ताना | उधमसिंह | आनन्द बख्शी |
| वैष्णव जन तो तेने कहिये (भजन) | - | पारंपरिक (लेखक: नरसी मेहता) | - | नरसी मेहता |
| आयो कहाँ से घन श्याम | बुड्ढा मिल गया (1971) | मन्ना डे, अर्चना | राहुल देव वर्मन | मज़रूह सुल्तानपुरी |
सबही शुद्ध सुर जहाँ, वादी गंधार सुहाय।
अरु संवादि निखाद तें, ईमन राग कहाय।।भावार्थ / विश्लेषण: राग यमन (कल्याण) में मध्यम (म) स्वर तीव्र प्रयुक्त होता है और अन्य सभी स्वर शुद्ध होते हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है। इसे 'ईमन' या 'कल्याण' भी कहा जाता है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| तू ही राम है, तू रहीम है, तू करीम कृष्ण खुदा हुआ | भजन (श्री रामचन्द्र कृपालु) | लता मंगेशकर | - | पारंपरिक |
| अभी ना जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं | हम दोनों (1961) | आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी | जयदेव | साहिर लुधियानवी |
| आये हो मेरी ज़िन्दगी में, तुम बहार बनके | राजा हिन्दुस्तानी (1996) | उदित नारायण | नदीम श्रवण | समीर |
| इन्हीं लोगों ने ले लीना, दुपट्टा मेरा | पाकीज़ा (1972) | लता मंगेशकर | गुलाम मोहम्मद, नौशाद | मज़रूह सुल्तानपुरी |
आरोही अवरोहि में सुर मनि कीन्हीं त्याग।
ध - ग संवादी-वादि तें कहि राग भूपाल।।भावार्थ / विश्लेषण: राग भूपाली के आरोह और अवरोह दोनों में मध्यम (म) और निषाद (नि) स्वर पूर्णतः वर्जित हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर धैवत (ध) है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| चंदा है तू मेरा, सूरज है तू | अराधना (1969) | लता मंगेशकर | सचिन देव वर्मन | आनन्द बख्शी |
| मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा ना कोई | मीरा (1947) | एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी | एस. वी. वेंकटरमन | पं. नरेन्द्र शर्मा |
| इन आँखों की मस्ती के, मस्ताने हज़ारों हैं | उमराव जान (1981) | आशा भोंसले | खैय्याम | हसरत जयपुरी |
| पंछी बनूँ, उड़ती फिरूँ, मस्त गगन में | चोरी‑चोरी (1956) | लता मंगेशकर | शंकर जयकिशन | हसरत जयपुरी |
| देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए | सिलसिला (1981) | आशा भोंसले, किशोर कुमार | शिव हरि | जावेद अख्तर |
थाट बिलावल प्रथम दिवस उतरत दोउ निषाद।
आरोहन मध्यम तजि कर, मानत ध ग सम्वाद।।भावार्थ / विश्लेषण: राग अल्हैया बिलावल बिलावल थाट से उत्पन्न होता है। इसके आरोह में मध्यम (म) स्वर वर्जित रहता है। अवरोह में दोनों निषाद (शुद्ध और कोमल) प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर धैवत (ध) और संवादी स्वर गांधार (ग) है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| एक प्यार का नग़मा है, मोजों की रवानी है | शोर (1978) | लता मंगेशकर, मुकेश | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | संतोष आनंद |
| तुमको देखा तो ये खयाल आया | साथ‑साथ (1992) | जगजीत सिंह | कुलदीप सिंह | जावेद अख्तर |
| सारे के सारे, गा मा को लेकर गाते चले | परिचय (1972) | किशोर कुमार, आशा भोंसले | राहुल देव वर्मन | गुलज़ार |
| बहती हवा सा था वो, उड़ती पतंग सा था वो | 3 इडियट्स (2009) | शान, शांतनु मोइत्रा | शांतनु मोइत्रा | सवानन्द किरकिरे |
रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी।
प्रात समय जाति संपूर्ण, सोहत सा संवादी।।भावार्थ / विश्लेषण: राग भैरवी में ऋषभ (रे), गांधार (ग), धैवत (ध) और निषाद (नि) ये चारों स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षड्ज (स) है। यह प्रातःकाल गाया जाने वाला संपूर्ण जाति का राग है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| आवारा हूँ या गर्दिश में हूँ आसमान का तारा हूँ | आवारा (1951) | मुकेश | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | शैलेन्द्र |
| भोर भये पनघट पे, मोरी | सत्यम् शिवम् सुन्दरम् (1978) | लता मंगेशकर | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | जावेद अख्तर |
| दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समायी | तीसरी कसम (1966) | मुकेश | शंकर जयकिशन | सवानन्द किरकिरे |
जब काफी के मेल में, आरोहन रि ध त्याग।
तृतीय प्रहर दिन ग, नि कोमल, मानत म स संवाद।।।भावार्थ / विश्लेषण: राग भीमपलासी काफी थाट के अंतर्गत आता है। इसके आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) स्वर वर्जित हैं। इसमें गांधार (ग) और निषाद (नि) स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसका वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षड्ज (स) है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| तुम मिले, दिल खिले | क्रिमिनल (1995) | कुमार सानू, अल्का याज्ञनिक | एम. एम. क्रीम | इंदीवर |
| ऐ अजनबी तू भी कभी | दिल से (1998) | महालक्ष्मी अय्यर, उदित नारायण | ए. आर. रहमान | गुलज़ार |
| दिल के टुकड़े-टुकड़े करके मुस्कुराके चल दिए | दादा (1979) | येशुदास | जुगल किशोर | कुलवन्त जानी |
| मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी | चंद्रकांता (1996) | मो. रफ़ी | एन. दत्त | साहिर लुधियानवी |
| नैनों में बदरा छाए, बिजली चमके मनवा डराए | मेरा साया (1966) | लता मंगेशकर | मदन मोहन | राजा मेंहदी अली खाँ |
आरोहन में रे, ध वर्जित गावत राग बिहाग।
प्रथम प्रहर निशि गाइए सोहत ग-नि संवाद।।भावार्थ / विश्लेषण: राग बिहाग के आरोह में ऋषभ (रे) और धैवत (ध) स्वर वर्जित हैं। इसका वादी स्वर गांधार (ग) और संवादी स्वर निषाद (नि) है। यह रात्रि के प्रथम प्रहर (या द्वितीय प्रहर) में गाया जाने वाला राग है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| तेरे प्यार में दिलदार | मेरे महबूब (1963) | लता मंगेशकर | नौशाद | शकील बदायूँनी |
| तेरे सुर और मेरे गीत | गूँज उठी शहनाई (1959) | लता मंगेशकर, मो. रफ़ी | बसन्त देसाई | भरत व्यास |
| ये क्या जगह है दोस्तों | उमराव जान (1981) | आशा भोंसले | खैय्याम | शाहरयार |
| सुहानी बेरियाँ बीती जाएँ | मिलान (1946) | पारूल घोष | अनिल विश्वास | आरजू लखनवी |
| ज़िंदगी के सफर में गुज़र जाते हैं जो मकाम | आपकी कसम (1974) | किशोर कुमार | राहुल देव बर्मन | आनंद बख्शी |
ग ध नि स्वर कोमल रहे आरोहन ग ध नि।
ध ग वादी सम्वादी से जौनपुरी पहचानी।।भावार्थ / विश्लेषण: राग जौनपुरी में गांधार (ग), धैवत (ध) और निषाद (नि) स्वर कोमल प्रयुक्त होते हैं। इसके आरोह में गांधार स्वर वर्जित रहता है। इसका वादी स्वर धैवत (ध) और संवादी स्वर गांधार (ग) है।
| गीत का नाम | फ़िल्म / चित्रपट | गायक / गायिका | संगीतकार | गीतकार |
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| घूँघट के पट खोल | जोगन (1950) | गीता दत्त | बूलो सी. रानी | मीरा बाई |
| दिल में हो तुम | सत्यमेव जयते (1985) | एस. जानकी | बप्पी लहरी | फारूख कैसर |
| दिल छेड़ कोई नगमा | इंस्पेक्टर (1956) | लता मंगेशकर | हेमन्त कुमार | एस. एच. बिहारी |
| पल पल है भारी | स्वदेश (2004) | अल्का याज्ञनिक | ए. आर. रहमान | जावेद अख्तर |
| मेरी याद में तुम ना | मदहोश (1951) | तलत महमूद | मदन मोहन | राजा मेंहदी अली खाँ |