संगीत के क्षेत्र में सभी वाद्य (अवनद्ध, घन, सुषिर, तत) मुख्यतः गायन की संगति के लिए आविष्कृत हुए हैं। समय के साथ महान कलाकारों के सौजन्य से अनेक वाद्यों ने स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित किया है, जिनमें अवनद्ध वर्ग से तबला और पखावज सर्वाधिक प्रमुख हैं।
विभिन्न घरानों की स्थापना और विकास में बंदिशों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बंदिशों के आधार पर ही अलग-अलग घरानों की पहचान होती है।
'उठान' का अर्थ है उठना या प्रारंभ करना। बनारस घराने के वादक अपने वादन का प्रारंभ पेशकार के स्थान पर उठान से करते हैं। यह मूलतः टुकड़ा और परण जैसी रचना होते हुए भी विभिन्न लयकारियों से युक्त होती है। इसका वादन विलंबित लय से शुरू होकर चौगुन, अठगुन तक जाता है। इसके बोल खुले और जोरदार होते हैं तथा अंत में एक तिहाई होती है।
जब कोई बड़ा और संपूर्ण बोल (जिसके अंत में तिहाई हो) हूबहू तीन बार बजाया जाता है, तो उसे चक्रदार कहते हैं। इसके अंतर्गत चक्रदार टुकड़ा, चक्रदार परण आदि आते हैं।
परण मूलतः पखावज का बोल है, जो आज तबला और कथक नृत्य में भी प्रयुक्त होता है। इसमें गंभीर, खुले और जोरदार बोलों (जैसे: धागतेटे, तागेतेटे, क्रिधातेटे, धमुकिटतक) का प्रयोग होता है। यह आकार में टुकड़े से बड़ा होता है और इसके अंत में तिहाई अनिवार्य होती है।
पेशकार फ़ारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है 'पेश करने वाला'। यह स्वतंत्र वादन की प्रारंभिक रचना है। इसकी प्रकृति कायदे जैसी होती है परंतु इसमें कायदे जैसी कठोर नियमबद्धता नहीं होती। इसका वादन मध्य लय की डगमगाती हुई चाल में होता है।
बाँट का अर्थ है विभाजित करना या विस्तार करना। यह कायदे की तरह की रचना है जिसे विभिन्न प्रकार से बाँटा जाता है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं: बोल बाँट और लय बाँट। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसके समापन भाग में एक रेला जुड़ा होता है।
फर्द या इक्कड़ तबला वादन की अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट अविस्तारशील रचना है। इसके वर्ण खुले और जोरदार होते हैं। इसमें टुकड़े-परण की तरह तिहाई नहीं होती। इसका समापन प्रायः 'धिरधिर किटितक' जैसे वर्णों से होता है। फर्द का शाब्दिक अर्थ 'अकेला' है, इसलिए इसका कोई जोड़ा नहीं होता। इसकी रचना का श्रेय बनारस घराने को जाता है।
गत तबले की अत्यंत महत्वपूर्ण और गेय रचना है। पुराने विद्वानों ने इसे 'तबले की शायरी' कहा है। इसमें तबले के मुलायम, खूबसूरत और कर्णप्रिय वर्णों का प्रयोग होता है। इसमें टुकड़ों की तरह तिहाई नहीं होती। इसके दो भाग होते हैं: खुले और बंद। यह सम के ठीक पहले समाप्त होती है। इसके विशेष प्रकारों में दोपल्ली गत (दो अलग-अलग लयों में प्रस्तुत) और तिपल्ली गत (तीन अलग-अलग लयों में प्रस्तुत) शामिल हैं।
लग्गी-लड़ी भारतीय उपशास्त्रीय और सुगम संगीत (कहरवा, दादरा, दीपचंदी तालों) में तबले पर बजाई जाने वाली रचना है। इसका विस्तार कायदे की तुलना में अधिक स्वतंत्रता से किया जाता है। लग्गी का छोटा भाग जब द्रुत गति से रेले के समान बजाया जाता है, तो उसे लड़ी कहते हैं।
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | धाऽ | तेटे | तेटे | धग | तेटे | घेड़ा | ऽन | कतक | तकत | कतग | दिगन | धाऽदीं | ऽताऽ | कऽतेटे | तेटेकत | गदिगन |
| चिह्न | X | 2 | 0 | 3 |
| मात्रा | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | नगतेटे | धगतेटेतेटे | कतगदिगन | दींऽऽनगिन | कऽतड़ाऽन | कतगदिगनतेटे | कतगदिगननगे | तेटेकतगदिगन | क्रिधातेटेगदिगन | धाऽकतगदिगन | धाऽक्रिधातेटे | गदिगनधाऽकत | गदिगनधाऽ | क्रिधातेटेगदिगन | धाऽकतगदिगन | धाऽ |
| चिह्न | X | 2 | 0 | 3 |
| मात्रा | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | ऽक्रिधातेटे | गदिगनधाऽकत | गदिगनधाऽ | क्रिधातेटेगदिगन | धाऽकतगदिन | धाऽक्रिधातेटे | गदिगनधाऽकत | गदिगनधाऽ | ऽऽ | क्रिधातेटेगदिगन | धाऽकतगदिगन | धाऽक्रिधातेटे | गदिगनधाऽकत | गदिगनधाऽ | क्रिधातेटेगदिगन | धाऽकतगदिगन धा (सम) |
| चिह्न | X | 2 | 0 | 3 | X |
| विभाग | प्रथम विभाग (1-4) | द्वितीय विभाग (5-8) | तृतीय विभाग (9-12) | चतुर्थ विभाग (13-16) | ||||||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 |
| बोल | धाऽन | धेतेटे | नगिन | तेतेटे | कतेटे | तगिन | धाऽन | धा | दीं | दीं | धातिरकिट | धतेटे | तकिट | धीकिट | ताऽन | धा |
| चिह्न | X | 2 | 0 | 3 | ||||||||||||
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | जयतिज | यतिजय | माऽतसु | रऽस्वती | चमचम | चनद्रमु | कुटसोऽ | हतअति | करबां | ऽधेऽसरु | विनयक | रतलेऽ |
| चिह्न | X | 0 | 2 | 0 | 3 | 4 | X | 0 | 2 | 0 | 3 | 4 |
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | धा | धिं | धा | ड़ा | धा | तिं | ना | ड़ा |
| चिह्न | X | 0 | ||||||