निसार हुसैन खान रामपुर सहसवान घराने के एक अत्यंत प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे।
अहमद जान थिरकवा तबला वादन के अद्भुत कलाकार और अद्वितीय प्रतिभा के धनी थे।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान विश्व प्रसिद्ध शहनाई वादक थे जिन्होंने शहनाई को शास्त्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया।
पंडित कंठे महाराज बनारस घराने के अत्यंत प्रतिष्ठित तबला वादक थे।
स्वामी पागल दास पखावज (मृदंग) वादन के क्षेत्र में एक अद्वितीय और महान हस्ताक्षर थे।
पंडित कुमार गंधर्व शास्त्रीय संगीत में अपनी क्रांतिकारी सोच और लोक संगीत के एकीकरण के लिए जाने जाते हैं।
पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने भारतीय संगीत को जन-साधारण तक पहुँचाने और संगीतकारों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
पंडित विनायकराव पटवर्धन पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के अत्यंत योग्य और प्रिय शिष्यों में से एक थे।
उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ पटियाला घराने के युगप्रवर्तक गायक थे, जिनकी आवाज में अद्भुत आकर्षण और लोच थी।
केसरबाई केरकर भारतीय शास्त्रीय संगीत इतिहास की सबसे प्रभावशाली और प्रख्यात महिला गायिकाओं में से एक थीं।
पंडित विष्णु नारायण भातखंडे ने आधुनिक हिंदुस्तानी संगीत पद्धति को वैज्ञानिक और व्यवस्थित रूप प्रदान किया।
डागर बंधुओं ने लुप्तप्राय हो रही प्राचीन ध्रुपद गायकी को वैश्विक मंच पर पुनर्जीवित किया।
| स्तंभ 'अ' (कलाकार/नाम) | स्तंभ 'आ' (संबद्ध तथ्य/स्थान/पुस्तक) |
|---|---|
| 1. स्वामी राम शंकर | (ग) पागल दास के सुर / (मृदंग-पखावज) |
| 2. पंडित कंठे महाराज | (घ) शिष्य-समता प्रसाद, गुदई महाराज, किशन महाराज |
| 3. स्वामी पागल दास | (ङ) तबला कौमुदी (पुस्तक रचना) |
| 4. कुमार गंधर्व | (क) कर्नाटक राज्य, बेलगाँव (जन्म स्थान) |
| 5. बड़े गुलाम अली खान | (ख) लाहौर के पास गाँव (कसूर - जन्म स्थान) |